“ हमारो वृंदावन उर ओर ,
माया काल तहाँ नहिं व्यापै, जहाँ रसिक सिरमौर || ”
- भगवत् रसिक, अनन्य निश्चयात्मक ग्रंथ [पूर्वार्ध] (41)
हमारे ह्रदय में नित्य वृंदावन है, जो माया तथा काल से परे है, जहां समस्त रसिकों के दिव्य चूड़ामणि युगल सरकार श्री राधा कृष्ण नित्य निवास करते हैं ।
माया काल तहाँ नहिं व्यापै, जहाँ रसिक सिरमौर || ”
- भगवत् रसिक, अनन्य निश्चयात्मक ग्रंथ [पूर्वार्ध] (41)
हमारे ह्रदय में नित्य वृंदावन है, जो माया तथा काल से परे है, जहां समस्त रसिकों के दिव्य चूड़ामणि युगल सरकार श्री राधा कृष्ण नित्य निवास करते हैं ।

![हमारो वृंदावन उर ओर - भगवत् रसिक, अनन्य निश्चयात्मक ग्रंथ [पूर्वार्ध] (41)](https://images.brajrasik.org/5a4b190559e8c72a534d8653-m.jpeg)