“ छिन छिन बनिक औरहि और || ”श्री  कुम्भनदास जी

“ छिन छिन बनिक औरहि और || ”श्री कुम्भनदास जी

“ छिन छिन बनिक औरहि और || ”
- श्री कुम्भनदास जी

राधा कृष्ण की सुंदरता हर क्षण नव नवायमान है ।