जिनके है यह प्रेम रस, सोई जानत रीत।
जो हारै तो पाईए, नेह खेत में जीत॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, प्रेमावली (13)
जो हारै तो पाईए, नेह खेत में जीत॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, प्रेमावली (13)
जिनको इस प्रेम-रस का अनुभव है, वे ही इसकी रीति जानते हैं। वे कि प्रेम के क्षेत्र में वही जीतता है जो सम्पूर्ण रूप से अपनी पराजय स्वीकार कर लेता है।

