“ ऐसी कृपा करो स्वामिनी मुहिं जुगुल नाम अति ही प्री लागै || ” - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (१७६) हे राधा, मुझे ऐसी आशीष दें कि मुझे युगल नाम अत्यंत प्रिय लगे ।