तजि के वृन्दाविपिन कों, और तीर्थ जे जात।
छाँड़ि विमल चिन्तामणी, कौड़ी कौं ललचात॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (81)
श्री वृंदावन धाम जैसे अद्वितीय स्थल को छोड़कर जो अन्य तीर्थों की ओर स्वार्थवश जाते हैं, वे वास्तव में महान मूर्ख हैं — वे मानो विमल और दुर्लभ चिंतामणि (इच्छा पूर्ति रत्न) को त्याग कर एक साधारण कौड़ी की लालसा कर रहे हैं।
छाँड़ि विमल चिन्तामणी, कौड़ी कौं ललचात॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (81)
श्री वृंदावन धाम जैसे अद्वितीय स्थल को छोड़कर जो अन्य तीर्थों की ओर स्वार्थवश जाते हैं, वे वास्तव में महान मूर्ख हैं — वे मानो विमल और दुर्लभ चिंतामणि (इच्छा पूर्ति रत्न) को त्याग कर एक साधारण कौड़ी की लालसा कर रहे हैं।

