हित हरिवंश विचारि कैं - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री स्फुट वाणी (7)

हित हरिवंश विचारि कैं - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री स्फुट वाणी (7)

हित हरिवंश विचारि कैं, यह मनुज देह गुरु चरण गहि।
सकहि तौ सब परपंच तजि, श्री कृष्ण कृष्ण गोविन्द कहि॥

- श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री स्फुट वाणी (7)

श्री हित हरिवंश महाप्रभु विचार पूर्वक कहते हैं कि इस दुर्लभ मानव देह को पाकर रसिक-गुरु के चरणों की शरण ग्रहण करो। यदि संभव हो, तो संसार के समस्त प्रपंचों (माया-जाल) का त्याग कर केवल 'श्री कृष्ण, कृष्ण, गोविन्द' के पावन नाम का ही निरंतर उच्चारण करो।