“ बसिके वृन्दाविपिन में, इतनौ बड़ौ सयान |
जुगल चरण के भजन बिन, निमिष न दीजै जान || ”
श्री ध्रुवदास, वृंदावन शत लीला (107)
श्री वृन्दावन में वास करके सबसे बड़ी समझदारी यही है कि श्री युगल सरकार के स्मरण के बिना एक क्षण भी न जाने पाए।
जुगल चरण के भजन बिन, निमिष न दीजै जान || ”
श्री ध्रुवदास, वृंदावन शत लीला (107)
श्री वृन्दावन में वास करके सबसे बड़ी समझदारी यही है कि श्री युगल सरकार के स्मरण के बिना एक क्षण भी न जाने पाए।

