एक नहीं मानेंगे अब हम वृन्दावन जावेंगे  - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (289)

एक नहीं मानेंगे अब हम वृन्दावन जावेंगे - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (289)

एक नहीं मानेंगे अब, हम वृन्दावन जावेंगे।
ललित किशोरी कौन कचोने, परे कुञ्ज गुन गावेंगे॥

- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (289)

श्रीललितकिशोरीजी उद्घोष करते हैं कि अब हम उस व्यक्ति की तनिक भी नहीं सुनेंगे जो हमें श्रीवृन्दावन धाम जाने से रोकने का प्रयत्न करेगा। हम तो श्रीवृन्दावन के कुंजों के किसी कोने-कचोने में एकांत भाव से श्रीराधा-कृष्ण के रसमय गुणों का अनवरत गान करेंगे।