वृंदावन धाम का तो गोविंद राधे, रस है अनिर्वचनीय बता दे || - राधा गोविंद गीत, जगदगुरु श्री कृपालु जी महाराज (5933) वृंदावन का रस परम और अवर्णनीय है।