"जो गुरु करे शिष्य की आस, श्याम भजन तैं होइ उदास ||" - स्वामी श्री बिहारिन देव जी जो गुरु अपने शिष्य से किसी भी तरह की मदद की आशा रखता है, वह श्याम भजन से कोसों दूर चला जाता है।