करि मन वृन्दावन सों हेत - श्री हरिराम व्यास (व्यास वाणी), पूर्वार्ध (91)

करि मन वृन्दावन सों हेत - श्री हरिराम व्यास (व्यास वाणी), पूर्वार्ध (91)

“ करि मन वृन्दावन सों हेत, निसि दिन छिन छाया जिनि छाड़हिं, रसिकन कौ रस खेत | "
- श्री हरिराम व्यास (व्यास वाणी), पूर्वार्ध (91)

अरे मन तू वृन्दावन से स्नेह और नेह बढ़ा, जो रसिक संतों का खेत है जहाँ नित्य ही वृन्दावन रस प्रकट होता है।