शब्दब्रह्मणि निष्णातो न निष्णायात् परे यदि ।
श्रमस्तस्य श्रमफलो ह्यधेनुमिव रक्षत: ॥
- श्रीमद भागवतम (11.11.18)
यदि कोई वेदों का सारा ज्ञान याद भी कर ले, लेकिन यदि वो अपना मन निरन्तर भगवान में ना लगा पाये, तो उसका ज्ञान उसके लिए उस बोझ की तरह है जैसे वो गाय को तो पाले परन्तु वो गाय दूध न देती हो
श्रमस्तस्य श्रमफलो ह्यधेनुमिव रक्षत: ॥
- श्रीमद भागवतम (11.11.18)
यदि कोई वेदों का सारा ज्ञान याद भी कर ले, लेकिन यदि वो अपना मन निरन्तर भगवान में ना लगा पाये, तो उसका ज्ञान उसके लिए उस बोझ की तरह है जैसे वो गाय को तो पाले परन्तु वो गाय दूध न देती हो

