वृन्दावन को जाना हेली - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (२८८)

वृन्दावन को जाना हेली - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (२८८)

वृन्दावन को जाना हेली, वृन्दावन को जाना है |
ललित किशोरी ने दृढ़ कर अब ये ही मन में ठाना है ||

- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (२८८)

वृंदावन में आने से पहले श्री ललित किशोरी द्वारा लिखे इस पद में वह कहते हैं कि, मेरी आत्मा ने निर्णय लिया है और इसकी इच्छा है कि मुझे केवल वृंदावन में ही जाना है।