किशोरी मोहि अपनी कर लीजै, और दिये कछु भावत नाहीं, श्री वृन्दावन दीजै,
- श्री हरिराम व्यास - व्यास वाणी, पूर्वार्ध (294)
- श्री हरिराम व्यास - व्यास वाणी, पूर्वार्ध (294)
श्री हरिराम व्यास जी श्री राधा रानी से प्रार्थना कर रहे हैं कि हे किशोरी जी कैसे भी मुझे अपनी बना लीजिये और कुछ चाहे मत दीजिये लेकिन मेरे हृदय में वृन्दावन का प्रेम एवं वास दे दीजिये।

