नहीं उऋण कबहुँ उपकार - जगदगुरु श्री कृपालु जी महाराज

नहीं उऋण कबहुँ उपकार - जगदगुरु श्री कृपालु जी महाराज

नहीं उऋण कबहुँ उपकार, बलिहार बलिहार॥
- जगदगुरु श्री कृपालु जी महाराज

हे श्री राधा, मैं कभी भी अपके कृपा के ऋण से मुक्त नहीं हो सकता। मैं अपने आप को बार-बार आपको न्योछावर करता हूँ।