भगवत रसिक मनाय लाडिली, करौं लाल दृग तारे॥
- भगवत रसिक जी, अनन्यरसिकभरण ग्रंथ 5 (6)
- भगवत रसिक जी, अनन्यरसिकभरण ग्रंथ 5 (6)
भगवत रसिक जी के शब्दों में "उन्होंने श्री राधा रानी को मना कर एवं उनका गुनगान करके ठाकुर जी को इतना रिझा लिया है की श्री बिहारी जी ने उनको अपनी आँख का तारा बना लिया है ।”

