“हरि तो तबहीं मिली हैं, जबहिं श्री गुरु होहिं कृपाल | ” - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी श्री कृष्ण तब ही मिलते हैं जब गुरुदेव की कृपा होती है।