“ राधा करावचित पल्लव वल्लरी के, राधा पदाङ्कविलसन्म मधुरस्थलीके |
राधा यशोमुखरमत्त खगावली के, राधा विहारविपिने रमतां मनो मे || ”
- श्री हित हरिवंश महाप्रभु - राधा सुधा निधि - 13
राधा यशोमुखरमत्त खगावली के, राधा विहारविपिने रमतां मनो मे || ”
- श्री हित हरिवंश महाप्रभु - राधा सुधा निधि - 13
हे मेरे मन तू, श्री राधा करों द्वारा स्पर्श की हुई पल्लव वल्लरी, श्री राधा चरणों से सुशोभित मनोहर स्थली, श्री राधा यशोगान से मुखरित मत्त खगावली सेवित एवं श्री राधा निज केलि कानन श्री वृन्दावन में रमन कर।

