“ राधा नाम को आधार, ललित किसोरी तासु भरोसे सोवत पांव पसार || ”
- श्री ललित किशोरी जी, अभिलाष माधुरी, विनय (२०५)
- श्री ललित किशोरी जी, अभिलाष माधुरी, विनय (२०५)
श्री ललित किशोरी जी की शब्दों में: “ श्री राधा नाम ही भक्ति का मूल आधार है, उसी नाम के बल पर दोनों पांव पसार कर अर्थात निर्भय होकर सोते हैं। ”

