सहजि अंग अंग रूप सार मोद मई - श्री ध्रुव दास

सहजि अंग अंग रूप सार मोद मई - श्री ध्रुव दास

“ सहजि अंग अंग रूप सार मोद मई, 'हित ध्रुव' प्राण न्यौछावर कर डारिये ||
- श्री ध्रुव दास

श्री हित ध्रुवदास जी श्री राधा के रूप का वर्णन करते हुए कहते हैं कि जहाँ जहाँ दृष्टि पड़ती है, वहीँ रस बरसता है। ऐसी प्यारी राधा रानी पर अपने प्राण न्यौछावर कर डालिये।