“ जुगल रूप रस चातक नैन |
राधा नन्द किशोर मिले विन, ललित किशोरी परत न चैन || ”
- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (९४)
राधा नन्द किशोर मिले विन, ललित किशोरी परत न चैन || ”
- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (९४)
यह नेत्र चातक पक्षी की भाँती युगल रूप रस (वृन्दावन रस) को लालायित हैं। श्री ललित किशोरी जी के शब्दों में युगल सरकार के बिन उनको एक क्षण का भी चैन नहीं |

