प्यारी श्री वृन्दावन की रैनु - श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार), पूर्वार्ध (9)

प्यारी श्री वृन्दावन की रैनु - श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार), पूर्वार्ध (9)

(राग सारंग)
“प्यारी श्री वृन्दावन की रैनु,
जाहि निरख मोहन सुख पावत, हरषि बजावत वैनु |
जहाँ तहँ राधा चरननिं के अंक विराजत ऐनु ||”

- श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार), व्यास वाणी, पूर्वार्ध (9)

वृंदावन की रज बहुत प्यारी है, श्री कृष्ण इसी वृंदावन की रज को नित्य ही निहारते रहते हैं और प्रसन्न होकर वह बांसुरी बजाते हैं। यह वह रज है जिसमें श्री श्री राधा चरण अंकित हैं |