लालन तेरेई आधीन - श्री विट्ठल विपुल देव जी, श्री विट्ठल विपुल देव जी की वाणी (20)

लालन तेरेई आधीन - श्री विट्ठल विपुल देव जी, श्री विट्ठल विपुल देव जी की वाणी (20)

“लालन तेरेई आधीन, तेरे रस बस श्यामसुंदर वर, जाचत हैं ज्यौं दीन ||”
- श्री विट्ठल विपुल देव जी, श्री विट्ठल विपुल देव जी की वाणी (20)

हे श्री राधा, श्री कृष्ण हमेशा आपके आधीन रहते हैं, आप जो रस बरसाती हैं उस रस के वश में वह स्वयं को दीन महसूस करते हैं |