पत्र फूल फल लता प्रति, रहत रसिक पिय चाहि।
नवल कुँवरि दृग छटा जल, तिहि करि सींचे आहि॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (36)
नवल कुँवरि दृग छटा जल, तिहि करि सींचे आहि॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (36)
श्रीवृन्दावन के प्रत्येक पत्र, पुष्प और नव-निकुंज की लताओं को रसिक-शिरोमणि प्रियतम श्रीकृष्ण अपलक निहारते रहते हैं। इसका रहस्य यह है कि इन सभी को किशोरी राधिका ने अपने स्नेह-जल-पूरित दृष्टि से सींचा है।

