“ ऐसो कब करिहौ मन मेरौ,
व्यासदास होय वृन्दावन में, रसिक जनन को चेरो || ”
- श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार), व्यास वाणी, पूर्वार्ध (102)
व्यासदास होय वृन्दावन में, रसिक जनन को चेरो || ”
- श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार), व्यास वाणी, पूर्वार्ध (102)
हे मन, ऐसा कब होगा जब तू रसिक संतों का दासत्व स्वीकार करेगा और श्री वृंदावन में रहेगा ?

