अति नागरी वृषभानु किसोरी - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, हित चौरासी (43)

अति नागरी वृषभानु किसोरी - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, हित चौरासी (43)

“ अति नागरी वृषभानु किसोरी |
सुनी दूतिका चपल मृगनैनी, आकरसत चितवत चित गोरी || ”

- श्री हित हरिवंश महाप्रभु, हित चौरासी (43)

श्री कृष्ण बोले - हे दूतिका! वृषभानु किशोरी अत्यंत चतुर हैं, जब वह चपल मृगलोचनि गोरी अपने मनोहर नेत्रों से अवलोकन करती हैं तो मानो उसी क्षण देखते ही चित्त का आकर्षण कर लेती हैं।