श्यामा जुत घनश्याम को मन में राखो ध्यान - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (२३६.३)

श्यामा जुत घनश्याम को मन में राखो ध्यान - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (२३६.३)

“ श्यामा जुत घनश्याम को मन में राखो ध्यान,
जुगुलाल छवि दृग धर, यह रसिकन पहिचान || ”

- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (२३६.३)

जो श्री राधा कृष्ण कि उपासना युगल रूप से करते हैं एवं दिव्य युगल के रूप का निरंतर ध्यान आँसु बहा कर करते हैं, उनको ही रसिक के रूप में पहचाना जा सकता है।