रसना कटौ जो अन रटौ - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, स्फुट वाणी (24.4)

रसना कटौ जो अन रटौ - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, स्फुट वाणी (24.4)

रसना कटौ जो अन रटौ, निरखि अन फुटौ नैन।
श्रवण फुटौ जो अन सुनो, बिनु राधा जसु बैन॥

- श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री हित स्फुट वाणी (24.4)

श्री हित हरिवंश महाप्रभु जी के शब्दों में: "मेरी जिह्वा कट जाए यदि मैं श्री राधा रानी के अलावा कुछ और रटूँ। मेरे नयन फूट जाएँ यदि मैं राधारानी के रूप के अलावा कुछ भी देखूँ। मेरे श्रवण भी फूट जाएँ यदि राधा रानी के यश के अलावा कोई भी बात मेरे श्रवण में पड़े।"