महिमा वृन्दा विपिन की, कैसे के कहि जाय।
ऐसे रसिक किशोर दोउ, जामें रहे लुभाय॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (34)
ऐसे रसिक किशोर दोउ, जामें रहे लुभाय॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (34)
रसिक सिरमौर श्री राधा-माधव युगल सरकार भी जिसकी माधुरी के लोभी हैं, ऐसे विलक्षण वृन्दावन की महिमा कहना कैसे सम्भव है।

