आठों याम वसे उर नैनन ललित माधुरी जोरी जू,
अब तो यहै कृपा करि दीजै, अहो स्वामिनी मोरी जू ||
- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (१७५)
अहो मेरी स्वामिनी श्री राधे जू, अब आप मुझपर ऐसी कृपा करें कि आठों याम मेरे नैनन और हृदय में दिव्य जोरी (श्री श्यामा श्याम) कि विराजित रहे |
अब तो यहै कृपा करि दीजै, अहो स्वामिनी मोरी जू ||
- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (१७५)
अहो मेरी स्वामिनी श्री राधे जू, अब आप मुझपर ऐसी कृपा करें कि आठों याम मेरे नैनन और हृदय में दिव्य जोरी (श्री श्यामा श्याम) कि विराजित रहे |

