कृपा करु बरसाने वारी, तेरी कृपा का भरोसा भारी - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज - ब्रज रस माधुरी  3 (9)

कृपा करु बरसाने वारी, तेरी कृपा का भरोसा भारी - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज - ब्रज रस माधुरी 3 (9)

कृपा करु बरसाने वारी, तेरी कृपा का भरोसा भारी ।
तेरा मन है कृपा का प्यारी , तेरा तन है कृपा का प्यारी।
तेरी कृपा तो कृपा है प्यारी, तेरा कोप भी कृपा है प्यारी |
तेरी कृपा चह बनवारी, तेरी कृपा की है बलिहारी |
कृपा पर कृपा करें प्यारी, ऐसी कृपा पर वारी वारी |
कोउ हो या न हो अधिकारी , सब पर कृपा करें प्यारी।
मुझ पर कृपा करु प्यारी , तब जानूँ तू कृपालु प्यारी ।
तेरी कृपा पाके पिय प्यारी बन गए हैं कृपालु प्यारी |
- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज - ब्रज रस माधुरी  3 (9)

हे बरसानेवाली श्री राधे, आप कृपा कीजिये, आपके ही कृपा का भारी भरोसा है मुझे।
आपका मन कृपा का है और आपका तन भी कृपा का है।
हे प्यारी, आपकी कृपा तो कृपा है ही, आपका कोप भी कृपा है।
आपकी कृपा की चाह श्री कृष्ण भी करते हैं, आपकी कृपा की बलिहारी है।
आप कृपा पर कृपा कर रही हैं, ऐसी कृपा पर मैं वारी वारी जाता हूँ।
चाहे कोई कृपा का अधिकारी हो या न हो, लेकिन हे प्यारी आप सब पर कृपा कर रही हैं।
मुझपर भी कृपा कीजिये प्यारी जू, तभी मैं मानूँगा की आप कृपालु हैं।
जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज कहते हैं "हे प्यारी जू,आपकी कृपा प्राप्त कर श्री कृष्ण भी कृपालु हो गए हैं।"