“ सर्वासां रसिकानां च देवीनामीश्वरी परा प्रवदन्ति पुरा सन्तस्तेन तां रसिकेश्वरीम् || ”
- ब्रह्म वैवर्त पुराण (4.17.225)
समस्त भगवद्स्वरूपो के उपासको में सर्वोत्तम श्रेणी होती है 'रसिक', उन समस्त रसिको की सर्वस्व प्राणाधिक इष्ट/स्वामिनी श्री राधा हैं, अत: श्री राधा का एक नाम 'रसिकेश्वरी' है।
- ब्रह्म वैवर्त पुराण (4.17.225)
समस्त भगवद्स्वरूपो के उपासको में सर्वोत्तम श्रेणी होती है 'रसिक', उन समस्त रसिको की सर्वस्व प्राणाधिक इष्ट/स्वामिनी श्री राधा हैं, अत: श्री राधा का एक नाम 'रसिकेश्वरी' है।

