प्रथम जथामति प्रनऊँ, श्री वृन्दावन अति रम्य।
श्री राधिका कृपा बिनु, सबके मननी अगम्य॥
- श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री हित चतुरासी (57)
मैं सर्वप्रथम अतिरमणीय श्री धाम वृन्दावन को प्रणाम करता हूँ, जो श्री राधिका की कृपा के बिना सर्वथा अगम्य है।
श्री राधिका कृपा बिनु, सबके मननी अगम्य॥
- श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री हित चतुरासी (57)
मैं सर्वप्रथम अतिरमणीय श्री धाम वृन्दावन को प्रणाम करता हूँ, जो श्री राधिका की कृपा के बिना सर्वथा अगम्य है।

