यह कौन बात जू अबहीं और अबहीं और - स्वामी श्री हरिदास, केलिमाल (54)

यह कौन बात जू अबहीं और अबहीं और - स्वामी श्री हरिदास, केलिमाल (54)

“ यह कौन बात जू अबहीं और अबहीं और |
श्री हरिदास के स्वामी श्यामा कुञ्ज बिहारी या रस ही बस भये और की और || ”

- स्वामी श्री हरिदास, केलिमाल

श्री हरिदास जी कहते हैं की श्री बिहारीजी श्री राधारानी से कहती हैं कि हे प्रिय जो आपका यह रस कितना अलौकिक है और किस प्रकार का है कि जितना भी इस रस को पियो ऐसा मन करता है कि इसको और पियो, अभी शान्ति नहीं हुई | श्री लाल जी तो मानो श्यामा जू के रस के अधीन ही हैं |