“श्री वृन्दावन की सोभा देखत विरले साधु सिरात,
इहि रस जिनके तन मन राचे तिन्ही न और सुहात ||”
- श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी, पूर्वार्ध (29)
विभिन्न संतों में भी अत्यंत दुर्लभ है, जो वृंदावन धाम की सच्ची महिमा को पहचान सकते हैं। यह वृन्दावन रस जिसने चख लिया उसे और कोई रस सुहा ही नहीं सकता !
इहि रस जिनके तन मन राचे तिन्ही न और सुहात ||”
- श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी, पूर्वार्ध (29)
विभिन्न संतों में भी अत्यंत दुर्लभ है, जो वृंदावन धाम की सच्ची महिमा को पहचान सकते हैं। यह वृन्दावन रस जिसने चख लिया उसे और कोई रस सुहा ही नहीं सकता !

