ऐसी स्वामिनी साहिबिनी, रसिक अनन्य उदार।
श्री बिहारिनिदासि प्रसन्न ह्वै, दियो अहार विहार॥
- श्री बिहारिन देव, श्री बिहारिन देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (150)
श्री बिहारिन देव के शब्दों में स्वामिनी श्री राधारानी अत्यन्त उदार हैं एवं रसिक अनन्य की नित्य सहायता करने वाली हैं। श्री बिहारिन देव जी कहते हैं कि मुझ पर तो मानो प्रिया प्रसन्न हो गयी हैं और अपना नित्य विहार रस दे दिया।
श्री बिहारिनिदासि प्रसन्न ह्वै, दियो अहार विहार॥
- श्री बिहारिन देव, श्री बिहारिन देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (150)
श्री बिहारिन देव के शब्दों में स्वामिनी श्री राधारानी अत्यन्त उदार हैं एवं रसिक अनन्य की नित्य सहायता करने वाली हैं। श्री बिहारिन देव जी कहते हैं कि मुझ पर तो मानो प्रिया प्रसन्न हो गयी हैं और अपना नित्य विहार रस दे दिया।

