हा हा करौ, परौ पायन अब, ना चलिहैं बरजोरी।
भगवत रसिक उदार स्वामिनी, दैहैं सर्बसु छोरी॥
- श्री भगवत रसिक, भगवत रसिक की वाणी, अनन्यरसिकभरण ग्रंथ 12 (2)
भगवत रसिक उदार स्वामिनी, दैहैं सर्बसु छोरी॥
- श्री भगवत रसिक, भगवत रसिक की वाणी, अनन्यरसिकभरण ग्रंथ 12 (2)
तुम तो अपना वही एक उपाय करो—हमारी प्यारी श्री राधा के चरणों में जाओ और करुण क्रन्दन करो! स्वामिनी जी बड़ी उदार हैं, ऐसा करते ही तुम्हें वह अपना सर्वस्व सौंप देंगी।

