(राग बिलावल)
आज इन दोउन पै बलि जैये ।
रोम रोम सों छबि बरसत है, निरखत नैन सिरैये ।।
रूप रास मृदु हास ललित मुख, उपमा देत लजैये ।
नारायण या गौर श्याम कों, हिये निकुंज बसैये ।।
- श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, नवपनिहारी लीला (52)
आज युगल सरकार पर बलिहार जाइए। आज रोम रोम की छवि (जो दिव्य आनंद एवं रस युक्त है ) पर बलिहार जाईये, जिसे देखकर नैन एक क्षण का वियोग बर्दाश नहीं कर सकते। रूप, रास, मृदुल हंसी और सुंदर मुख देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो उनकी तुलना किसी अन्य वस्तु से करने में भी लज्जा आ रही है। नारायण स्वामी,वृन्दावन के रसिक कहते हैं कि हमारे हृदय रूपी निकुंज में यह युगल सरकार अर्थात गौर श्याम वर्ण जोड़ी नित्य वास करे।
आज इन दोउन पै बलि जैये ।
रोम रोम सों छबि बरसत है, निरखत नैन सिरैये ।।
रूप रास मृदु हास ललित मुख, उपमा देत लजैये ।
नारायण या गौर श्याम कों, हिये निकुंज बसैये ।।
- श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, नवपनिहारी लीला (52)
आज युगल सरकार पर बलिहार जाइए। आज रोम रोम की छवि (जो दिव्य आनंद एवं रस युक्त है ) पर बलिहार जाईये, जिसे देखकर नैन एक क्षण का वियोग बर्दाश नहीं कर सकते। रूप, रास, मृदुल हंसी और सुंदर मुख देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो उनकी तुलना किसी अन्य वस्तु से करने में भी लज्जा आ रही है। नारायण स्वामी,वृन्दावन के रसिक कहते हैं कि हमारे हृदय रूपी निकुंज में यह युगल सरकार अर्थात गौर श्याम वर्ण जोड़ी नित्य वास करे।

