हमारें माई स्यामा जू कौ राज - श्री विठ्ठल विपुल देव जी महाराज, श्री विट्ठल विपुल देव जी की वाणी (27)

हमारें माई स्यामा जू कौ राज - श्री विठ्ठल विपुल देव जी महाराज, श्री विट्ठल विपुल देव जी की वाणी (27)

(राग मल्हार)
हमारें माई स्यामा जू कौ राज ।
जाके अधीन सदाई साँवरौ या ब्रज कौ सिरताज॥ [1]
यह जोरी अविचल वृन्दावन नाहिं आन सों काज ।
श्री विट्ठल विपुल बिहारिनि के बल दिन जलधर ज्यौ गाज॥ [2]

- श्री विठ्ठल विपुल देव जी महाराज, श्री विट्ठल विपुल देव जी की वाणी (27)

श्री विठ्ठल विपुल देव कहते हैं कि हमारे प्रेम-रस देश में केवल श्री श्यामा जू (श्री राधा) का ही एक-छात्र राज्य है, जिनके प्रेम के अधीन स्वयं ब्रज के शिरोमणि श्री कृष्ण हैं। [1]

यह प्रेममयी जोड़ी (विहारी-विहारिणी जू) वृन्दावन की रस-माधुरी में सदैव तदाकार होकर अविचल रूप से नित्य विहार करती है। हम इस दिव्य जोड़ी के प्रति ऐसे दृढ़ अनन्य हैं कि इनके अतिरिक्त हमारा अन्य किसी से कोई संबंध नहीं है। 
जिस प्रकार घन के निकट दामिनी प्रफुल्लित होकर गर्जना करती है, उसीप्रकार हम भी उद्घोष करते हैं कि केवल श्री राधा महारानी के बल पर ही हमको नित्य विहार रस की प्राप्ति होती है। [2]