" मनुवां शीख हमारी है" - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (२४६)

" मनुवां शीख हमारी है" - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (२४६)

(राग षत)
मनुवां शीख हमारी है |
चूर चूर ह्वै ब्रजरज मिलिये येही शोभा सारी है ||
सोता है बेहोस पड़ा क्या चलने की तैयारी है |
ललितकिशोरी चरण शरण रह आखिर कुंजबिहारी है |

- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (२४६)

अरे मनुष्यों हमारी सीख है कि तन मन को पूर्ण रूप से ब्रज रज में समर्पित कर दो यही इसकी शोभा है | अरे तू क्यों बेहोश होकर माँ, बाप, बेटा, स्त्री, पति इत्यादि में मन का समर्पण करके इस दुर्लभ वृन्दावन रस से वंचित है | श्री ललित किशोरी जी कहते हैं की अब भी समय है मान जा, और श्री बिहारीजी महाराज की शरण में आजा क्यूंकि आखिर उन्होंने ही तेरा साथ देना है |