(राग देस)
राधा नाम को उर धार,
मिलहिं रसिक मुकुटमणि मोहन आपहिं कुंजन द्वार,
आठों जाम छकेंगी अँखियाँ छवि निकुंज विहार,
ललित किशोरी फीके परिहैं सरवस सुख संसार ||
- ललित किशोरी जी, अभिलाष माधुरी, विनय (२०४)
राधा नाम को उर धार,
मिलहिं रसिक मुकुटमणि मोहन आपहिं कुंजन द्वार,
आठों जाम छकेंगी अँखियाँ छवि निकुंज विहार,
ललित किशोरी फीके परिहैं सरवस सुख संसार ||
- ललित किशोरी जी, अभिलाष माधुरी, विनय (२०४)
आपको केवल राधा नाम को हृदय से धारण करना है, यह मान कर की किशोरीजी के नाम में वह बैठी हैं। आपको बिना प्रयास के ही श्याम सुन्दर कुञ्ज द्वार में मिल जाएंगे। श्री ललित किशोरीजी के शब्दों में राधा कृष्ण के रस को आठों याम अँखियाँ चखेंगी और निकुंज विहार रस प्राप्त होगा और संसार का समस्त बड़े से बड़ा सुख भी तुच्छ लगेगा।

