"वृन्दावन की शोभा देखत मेरे नैन सिरात |" - श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी

"वृन्दावन की शोभा देखत मेरे नैन सिरात |" - श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी

"वृन्दावन की शोभा देखत मेरे नैन सिरात |"
- श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी

वृन्दावन की शोभा को देखकर हमारे नयन (आनंद रस से) शीतल बने रहते हैं।