श्रीपति श्रीमुख कमल कह्मौ - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (42)

श्रीपति श्रीमुख कमल कह्मौ - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (42)

श्रीपति श्रीमुख कमल कह्मौ, नारद सौं समुझाई।
वन्दावन रस सबनि तें, राख्यौ दूरि दुराइ॥

- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (42)

रमाकान्त भगवान नारायण ने श्री नारद जी से स्वयं कहा है कि मैंने श्री वृन्दावन रस सबसे छिपाकर रखा है। यह रस परम रहस्य है।