कीरत सुता के पग-पग पै प्रयाग यहाँ, केशव की कुँज केलि कोटि कोटि काशी हैं।
स्वर्ग अपवर्ग बृथा ही लै करेंगे कहा, जानि लेहु हमें हम वृन्दावन वासी हैं॥
- वृन्दावन वासी
स्वर्ग अपवर्ग बृथा ही लै करेंगे कहा, जानि लेहु हमें हम वृन्दावन वासी हैं॥
- वृन्दावन वासी
एक वृन्दावन वासी कहता है: "जहाँ कीरती कुमारी श्री राधा के पग-पग पर प्रयाग तीर्थ विराजमान हैं, जहाँ श्री कृष्ण के केलि कुंज में कोटि-कोटि काशी तीर्थ समाहित हैं, तो भला हम व्यर्थ में स्वर्ग, अपवर्ग आदि लोकों का निवास लेकर क्या करेंगे? क्योंकि हम तो वृन्दावन के वासी हैं।

