सब सारनि को सार सुनि - श्री बिहारिन देव, बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (151)

सब सारनि को सार सुनि - श्री बिहारिन देव, बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (151)

सब सारनि कौ सार सुनि, सव तत्वनि को तत्व।
विहारिनदास अनन्य मत, बड़ो ममत्य एकत्व॥

- श्री बिहारिन देव, बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (151)

रसिक अनन्य श्रीबिहारिनदेवजी का परम सिद्धांत है कि समस्त शास्त्रों का सार और भक्ति के समस्त तत्त्वों का चरम निष्कर्ष यही है कि अनन्य भाव और पूर्ण ममता के साथ अपना चित्त प्रतिपल केवल प्रिया-प्रियतम में ही मग्न रहे।