साधन श्रम न कछु किये न कछु करने जोग - श्री बिहारिन देव जी, बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (149)

साधन श्रम न कछु किये न कछु करने जोग - श्री बिहारिन देव जी, बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (149)

साधन श्रम न कछु किये, न कछु करने जोग।
कृपा बिहारिनिदासी को, सहज संयोगी भोग॥

- श्री बिहारिन देव जी, बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (149)

न तो मैंने कोई साधन किया है, और न ही करने योग्य हूँ। यह तो एकमात्र बिहारिनी श्री राधा रानी की कृपा है कि सहज ही वृन्दावन रस अर्थात् नित्य विहार रस का अनुभव हो गया।