युगल रस वृन्दावन बरसे,
मणि रमणी राधा गज गमनि, कमनी मनहर से ||
- जगदगुरु श्री कृपालु जी महाराज - प्रेम रस मदिरा, युगल माधुरी (4)
मणि रमणी राधा गज गमनि, कमनी मनहर से ||
- जगदगुरु श्री कृपालु जी महाराज - प्रेम रस मदिरा, युगल माधुरी (4)
वृन्दावन में श्यामा - श्याम का दिव्य - प्रेम रस बरस रहा है । रसिकों के शिरोमणि , इन्द्रनीलमणि के समान कांति वाले कौस्तुभ - मणि धारण किये हुए श्यामसुन्दर नितान्त मनोहारी है । समस्त स्त्रियों में मणि स्वरूपा , मतवाले हाथी की चाल वाली किशोरी जी श्यामसुन्दर से भी अधिक मनोहारिणी है ।

