रीति भजन की यहै ध्रुव छाँडो सब की आस - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, भजन शत लीला (52)

रीति भजन की यहै ध्रुव छाँडो सब की आस - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, भजन शत लीला (52)

रीति भजन की यहै ध्रुव, छाँडो सब की आस।
जुगल चरन की शरन गहि, मनमें धरि विश्वास॥

- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, भजन शत लीला (52)

श्रीध्रुवदासजी के अनुसार भजन की वास्तविक पद्धति यही है कि साधक इस नश्वर संसार की समस्त आशाओं का त्याग कर, पूर्ण श्रद्धा और अटूट विश्वास के साथ केवल श्रीश्यामा-श्याम की पावन शरण में स्वयं को समर्पित कर दे।