मौकों आस स्वामिनी तेरी  - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (७५)

मौकों आस स्वामिनी तेरी - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (७५)

“ मौकों आस स्वामिनी तेरी, करे पान बिन युगल माधुरी, तलफत अखियाँ मीनसी मेरी || ”
- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (७५)

हे किशोरीजी मुझे केवल आपकी ही आशा है। एक क्षण भी युगल माधुरी के बिना मेरी अँखियाँ ऐसे तड़पती हैं जैसे बिना पानी के मीन।