तिय सुत नाती नातिनी तिनहीं तन चित दीय - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, मन शिक्षा (62)

तिय सुत नाती नातिनी तिनहीं तन चित दीय - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, मन शिक्षा (62)

तिय सुत नाती नातिनी, तिनहीं तन चित दीय।
(श्री) राधावल्लभ लाल जू, नेकु न आने हीय॥

- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, मन शिक्षा (62)

पत्नी, पुत्र, पुत्री, नाती-नातिनों आदि में ही जिनका चित्त आसक्त रहता है, उनके हृदय में श्री राधावल्लभ लाल जी तनिक भी नहीं आ पाते।